GPM: जनपद पंचायत के आदेशों की अवहेलना, ग्राम पंचायत नरौर के आश्रित ग्राम झिरना पोड़ी से पिपरिया पहुंचमार्ग बरसात में भी बनता रहा पुल, अधिकारियों ने लिया कड़ा संज्ञान

गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही,:- जनपद पंचायत मरवाही क्षेत्र अंतर्गत ग्राम पंचायत नरौर के आश्रित गांव झिरना पोड़ी में बिना अनुमति और विभागीय निर्देशों के विपरीत जाकर पुल निर्माण कराने का मामला सामने आया है।
क्या है मामला :-

जनपद पंचायत मरवाही के सीईओ एवं प्रभारी इंजीनियर द्वारा बरसात के कारण निर्माण कार्य की गुणवत्ता प्रभावित होने और तकनीकी कारणों से *पुल निर्माण कार्य को तत्काल रोकने के लिखित आदेश* जारी किए गए थे। इसके बावजूद नरौर के सरपंच द्वारा निर्माण कार्य जारी रखा गया। स्थानीय ग्रामीणों और भूमि स्वामी की शिकायत पर जांच में पाया गया कि पुल के हत्थे का निर्माण संबंधित भूमि स्वामी के खेत में लगभग 4 फिट अंदर तक कर दिया गया है। इससे निजी भूमि पर अतिक्रमण की स्थिति निर्मित हुई है एवं जिस जगह पर पुल का निर्माण किया जा रहा है, वहां पर किसी प्रकार से पानी की निकासी नहीं पाई गई, यदि भूमि स्वामी चाहे तो अपने खेत के दूसरी तरफ से पानी की निकासी कर सकता है, जो कि नवनिर्मित पुल के जस्ट 5 मीटर नीचे बना है,,पुराने तकनीकी सहायकों ने समझ बूझ कर पुराने पुल का निर्माण करवाया था, जिससे यह स्पष्ट होता है कि 15 वें वित कार्य में जिस पुल का निर्माण कराया गया वह सिर्फ शासन के पैसे का दुरुपयोग है, ग्राम पंचायत सरपंच एवं उनके पति के द्वारा अपनी जेब गर्म करने के देशी जुगाड किया गया है।
अधिकारियों का पक्ष :-

जनपद पंचायत मरवाही के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया “बरसात के दौरान RCC निर्माण कार्य मध्यप्रदेश/छत्तीसगढ़ लोक निर्माण विभाग मैनुअल और ग्रामीण सड़क नियमों के अनुसार प्रतिबंधित है। इससे निर्माण की गुणवत्ता और मजबूती प्रभावित होती है। इसी कारण विभाग द्वारा कार्य रोकने के निर्देश दिए गए थे।” अधिकारी ने आगे कहा, “किसी भी शासकीय निर्माण से पहले भूमि अधिग्रहण/सीमांकन और तकनीकी स्वीकृति अनिवार्य है। निजी भूमि पर बिना सहमति निर्माण करना भू-राजस्व संहिता और पंचायत राज अधिनियम का उल्लंघन है। इस मामले में सरपंच द्वारा विभागीय आदेशों की अवहेलना की गई है।”
अब क्या होगी कार्रवाई :-

जनपद पंचायत ने तत्काल प्रभाव से निर्माण कार्य रुकवा दिया है। मामले में तकनीकी जांच दल गठित किया गया है। दोषी पाए जाने पर संबंधित के विरुद्ध छत्तीसगढ़ पंचायत राज अधिनियम 1993 की धारा 40 के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई और रिकवरी की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। साथ ही भूमि स्वामी की जमीन का सीमांकन कर नुकसान का आकलन किया जाएगा। ग्रामीणों ने प्रशासन से पुल के दोनों तरफ एप्रोच रोड बनाकर उसे जल्द उपयोगी बनाने की मांग की है।









